Tere Mamtamayi Roop Ki Ek Murat Sajai Hai
तेरे ममतामयी रूप की माँ,
एक मूरत सजाई है,
हर घडी दिल में रहती जो मैया,
वो सूरत सजाई है।।
मुझको तेरी दया की,
नज़र है मिली,
आने वाली है माँ,
तू खबर है मिली,
तेरे स्वागत में ऐ मेरी मैया,
मैंने पलकें बिछाई है,
तेरे ममतामई रूप की मां,
एक मूरत सजाई है।।
तुमको पहचान लूंगा,
तेरा लाल हूँ,
करने को तेरा,
दीदार बेहाल हूँ,
करते करते तेरा इंतज़ार माँ,
कई रातें बिताई है,
तेरे ममतामई रूप की मां,
एक मूरत सजाई है।।
माँ ‘सोनू लक्खा’ करे,
विनती वरदान दो,
तेरे गुण गा सकूं माँ,
मुझे ज्ञान दो,
सांस चरणों में कर दूंगा अर्पण,
मैंने माला बनाई है,
तेरे ममतामई रूप की मां,
एक मूरत सजाई है।।
तेरे ममतामयी रूप की माँ,
एक मूरत सजाई है,
हर घडी दिल में रहती जो मैया,
वो सूरत सजाई है।।
Singer / Lyrics – Sonu Lakha