धन्य हुई सांवेर की धरती जहाँ लगे दरबार तुम्हारा लिरिक्स
Dhany Huyi Sawer Ki Dharti Jaha Lage Darbar Tumahar Lyrics उल्टे है हनुमान जहाँ, चोला सिंदूरी धारा, धन्य हुई सांवेर की धरती, जहाँ लगे दरबार तुम्हारा।। त्रेता मे लाँगूर यहीं, पाताल विजय कर आया, इस कलयुग में भी हम सब पर, है इनका ही साया, इनकी दया दृष्टि में आया, ये सांवेर हमारा, सबका रक्षक … Read more